रुद्रप्रयाग: चंद्रशिला में दर्दनाक हादसा: लखनऊ के दो सगे भाइयों की मौत

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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले स्थित प्रसिद्ध तुंगनाथ-चंद्रशिला ट्रेक पर शुक्रवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। चंद्रशिला शिखर के पास करीब साढ़े चार बजे हुए वज्रपात (आकाशीय बिजली गिरने) की चपेट में आने से लखनऊ के दो सगे भाइयों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य युवक घायल हो गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार लखनऊ निवासी अभिनव वाजपेयी (19 वर्ष) और उनके बड़े भाई अभिषेक वाजपेयी (22 वर्ष) अपने साथियों के साथ चंद्रशिला क्षेत्र में ट्रेकिंग के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान मौसम अचानक खराब हो गया और तेज गर्जना के बीच बिजली गिर गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वज्रपात इतना तेज था कि अभिनव वाजपेयी की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से घायल अभिषेक वाजपेयी को तत्काल नीचे लाने का प्रयास किया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने के कुछ समय बाद उन्होंने भी दम तोड़ दिया।

दो अन्य युवक घायल
इस हादसे में आजन मिश्रा (लखनऊ) और शुभम शुक्ला (उन्नाव) भी घायल हुए हैं। दोनों को प्राथमिक उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऊखीमठ लाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों के अनुसार दोनों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

राहत एवं बचाव कार्य में आई दिक्कतें
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और प्रशासन की टीम ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। हालांकि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण घायलों को नीचे लाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मक्कूमठ तुंगनाथ के पंच पुरोहित समिति के अध्यक्ष रेवाधर मैठाणी ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद जिला आपदा प्रबंधन विभाग और पर्यटन विभाग से स्ट्रैचर की मांग की गई थी, लेकिन समय पर व्यवस्था नहीं हो सकी। उनका कहना है कि यदि पर्वतीय पर्यटन स्थलों पर पर्याप्त आपदा संसाधन उपलब्ध हों तो ऐसी परिस्थितियों में राहत कार्य अधिक तेजी से किया जा सकता है।

मौसम विभाग की चेतावनी
विशेषज्ञों के अनुसार मानसून पूर्व और मानसून के दौरान उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है। तुंगनाथ और चंद्रशिला जैसे खुले पर्वतीय क्षेत्रों में वज्रपात का खतरा अधिक रहता है। मौसम विभाग लगातार यात्रियों और ट्रेकर्स को खराब मौसम के दौरान ऊंची चोटियों और खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह देता रहा है।

पर्यटन स्थल पर पसरा शोक
चंद्रशिला और तुंगनाथ क्षेत्र में हुए इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों, यात्रियों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों में शोक की लहर है। एक धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थल पर हुई इस घटना ने पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्थाओं और आपदा प्रबंधन तैयारियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस हादसे ने एक बार फिर साबित किया है कि हिमालयी क्षेत्रों में मौसम की चेतावनियों को गंभीरता से लेना और आपदा सुरक्षा संसाधनों को मजबूत करना कितना जरूरी है।