विदेश में काम करने वाले भारतीयों की संख्या तीन गुना बढ़ी, 2023 में 3.98 लाख को मिली इमिग्रेशन क्लीयरेंस

The number of Indians working abroad increased three times, 3.98 lakh got immigration clearance in 2023
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नई दिल्ली। पिछले तीन वर्षों में विदेश जाकर काम करने वाले भारतीयों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। 2021 में जहां 1,32,675 लोगों को इमिग्रेशन क्लीयरेंस दी गई थी, वहीं 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 3,98,317 हो गया। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों से सामने आई है।

6 देशों के साथ श्रम समझौते
विदेशों में भारतीय कामगारों की संख्या में इस वृद्धि के पीछे मुख्य वजह भारत द्वारा छह देशों के साथ किए गए श्रम गतिशीलता समझौते हैं। इन देशों में इजराइल, ताइवान, मलेशिया, जापान, पुर्तगाल और मॉरीशस शामिल हैं। इन समझौतों ने भारतीय श्रमिकों के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं।

इन देशों में बढ़ रही है भारतीय श्रमिकों की मांग
भारतीय कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों की सबसे अधिक मांग पश्चिम एशियाई देशों जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, ओमान, बहरीन और कुवैत में है। इसके अलावा, इजराइल भी भारतीय श्रमिकों के लिए एक प्रमुख गंतव्य बनकर उभरा है। इन देशों में भारतीय श्रमिक मुख्य रूप से निर्माण, घरेलू काम और सेवा क्षेत्र में कार्यरत हैं।

अर्ध-कुशल और अकुशल श्रमिकों की संख्या बढ़ी
कौशल विकास मंत्रालय के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में अर्ध-कुशल और अकुशल श्रमिकों को दी जाने वाली इमिग्रेशन क्लीयरेंस की संख्या में तीन गुना वृद्धि हुई है।

सालवार आंकड़े:
2021: 1,32,675
2022: 3,73,425
2023: 3,98,317

ई-माइग्रेट पोर्टल का महत्व
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ई-माइग्रेट पोर्टल पर 2,200 से अधिक सक्रिय भर्ती एजेंट और 2,82,000 से अधिक विदेशी नियोक्ता पंजीकृत हैं। ईसीआर (इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड) देशों में भारतीय श्रमिकों को नियुक्त करने के लिए विदेशी नियोक्ताओं को इस पोर्टल पर विदेश मंत्रालय से अनुमति लेनी होती है। उन्हें रोजगार की शर्तों, वेतन और काम करने की स्थिति जैसी जानकारी भी प्रदान करनी होती है।

भविष्य की संभावनाएं
विदेश में बढ़ती मांग और श्रम गतिशीलता समझौतों के तहत, भारतीय श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसरों में और वृद्धि होने की संभावना है। यह न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को विदेशी मुद्रा से लाभ पहुंचाएगा, बल्कि भारत के श्रमबल को वैश्विक स्तर पर मजबूती भी प्रदान करेगा।